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संतों का फूटा गुस्सा – “अब अधिकारी ही कर लें कुंभ का आयोजन! सिंहस्थ की बैठकों में नहीं बुलाने से संत समाज नाराज, अब करेंगे बैठकों का बहिष्कार
उज्जैन लाइव, उज्जैन, श्रुति घुरैया:
सिंहस्थ 2028 की तैयारियों को लेकर संत समाज और प्रशासन के बीच जबरदस्त टकराव सामने आया है। नाराज साधु-संतों ने सिंहस्थ से जुड़ी बैठकों के बहिष्कार की धमकी दे दी है। वजह? उन्हें बैठक में बुलाया ही नहीं गया!
दरअसल, रविवार और सोमवार को उज्जैन में अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा की अध्यक्षता में सिंहस्थ की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इसमें विधायक, प्रशासनिक अधिकारी और जनप्रतिनिधि शामिल हुए, लेकिन संत समाज को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया। इस पर अखाड़ा परिषद के संतों ने नाराजगी जाहिर करते हुए सिंहस्थ की सभी बैठकों से दूरी बनाने की चेतावनी दे दी है।
“क्या अधिकारी ही घर बैठकर सिंहस्थ कर लेंगे?” – अखाड़ा परिषद का गुस्सा
संतों का गुस्सा इस कदर भड़क उठा है कि अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रामेश्वर दास महाराज ने सरकार पर सीधा निशाना साधते हुए कहा—
- “जब मुख्यमंत्री से मुलाकात हुई थी, तब उन्होंने हमें आश्वासन दिया था कि सिंहस्थ की हर बैठक में हमारी राय ली जाएगी। लेकिन आज तक हमें किसी बैठक में नहीं बुलाया गया, ना ही हमारी जरूरतों पर कोई चर्चा की गई।”
- “क्या अधिकारी ही घर बैठकर सिंहस्थ कर लेंगे? साधु-संतों की राय के बिना कुंभ का आयोजन कैसे हो सकता है?”
- “अगर हमें ऐसे ही नजरअंदाज किया जाता रहा, तो संत समाज सिंहस्थ की बैठकों का बहिष्कार करेगा!”
संतों को दरकिनार कर प्रशासन ने कर लिया मेला क्षेत्र का निरीक्षण!
बता दें, सिर्फ बैठक ही नहीं, बल्कि प्रशासन ने सिंहस्थ के प्रमुख मेला क्षेत्र, पेशवाई मार्ग, महाकाल मंदिर, महाराजवाड़ा, पुलिस कंट्रोल रूम और पार्किंग स्थल का निरीक्षण भी किया। लेकिन संतों को एक बार फिर बुलाने की जरूरत नहीं समझी गई। इसके बाद संत समाज में नाराजगी इतनी बढ़ गई है कि उन्होंने सिंहस्थ से जुड़े सभी आयोजनों से खुद को अलग करने की धमकी दी है।
दो दिन चली इस बैठक में उज्जैन, देवास, मंदसौर, शाजापुर, नीमच के विधायक, उज्जैन महापौर मुकेश टटवाल, संभागायुक्त संजय गुप्ता, आईजी उमेश योगा, डीआईजी नवनीत भसीन, कलेक्टर नीरज कुमार सिंह, पुलिस अधीक्षक प्रदीप कुमार शर्मा शामिल हुए। लेकिन अब सवाल उठता है कि क्या प्रशासन और सरकार सिंहस्थ जैसे धार्मिक आयोजन को केवल अधिकारियों और विधायकों के भरोसे पूरा करेगी? जब सिंहस्थ का आयोजन साधु-संतों के नेतृत्व में होता है, तो उन्हें ही बाहर क्यों रखा जा रहा है?
संत समाज ने खुली चेतावनी दी है कि अगर प्रशासन का यही रवैया रहा, तो वे सिंहस्थ की तैयारियों से खुद को अलग कर लेंगे। इसका असर सिंहस्थ 2028 की व्यवस्थाओं पर गहरा पड़ सकता है।